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Indian artist revives Bundelkhand’s centuries-old mask-making tradition - आधुनिक रंग भरकर बुंदेलखंड के कलाकार रोहित विनायक मुखौटे बनाने की प्राचीन कला को दे रहे हैं नया जीवन

Informações:

Synopsis

Traditional masks from Jalaun in Bundelkhand, once handmade for centuries using local materials, were fading due to rising costs and declining interest. Artist Rohit Vinayak revived this art by giving it a modern touch, adding calligraphy, new colors, sketches, and Chiteri art, making the masks more attractive and durable, and bringing the tradition back to life. - अक्सर आपने मुखौटे देखे होंगे, डरावने, रहस्यमयी या आकर्षक भाव लिए हुए। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के जालौन में ये मुखौटे सैकड़ों सालों से स्थानीय सामग्री जैसे कपड़े, पीली मिट्टी और रंगों से हाथों से बनाए जाते रहे हैं। समय के साथ बढ़ती लागत, घटती मांग और लोगों की कम होती दिलचस्पी के कारण यह पारंपरिक कला लुप्त होने लगी थी। हालांकि, बुंदेलखंड के कलाकार रोहित विनायक ने इसे आधुनिक रूप देकर नया जीवन दिया। उन्होंने इस कला में कैलीग्राफी, स्केचिंग, नए रंग और बुंदेलखंड की चितेरी कला से जोड़कर इसे न सिर्फ आकर्षक बनाया, बल्कि अधिक टिकाऊ भी बनाया। उनके प्रयासों से यह पारंपरिक मुखौटा कला आज नए रूप में फिर से जीवित हो उठी है।